धान-मक्का समेत फसलों को नुकसान की आशंका आज और कल भारी बारिश की संभावना, गरज-चमक के साथ वज्रपात का खतरा; किसानों को खेतों से पानी निकालने की सलाह
कुशीनगर में अगले तीन दिनों तक मौसम खराब रहने की संभावना है। भारत मौसम विज्ञान विभाग, क्षेत्रीय मौसम केंद्र लखनऊ की ओर से 24 सितंबर को जारी प्रभाव आधारित पूर्वानुमान में जिले में बारिश के साथ तेज हवाएं, गरज-चमक और वज्रपात की चेतावनी दी गई है। 24 सितंबर से 27 सितंबर तक कुशीनगर को बारिश और तेज हवा की संभावित प्रभावित क्षेत्रों की सूची में रखा गया है।

24 सितंबर से बारिश का दौर, 30 से 40 किमी की हवा
आईएमडी के अनुसार 24 सितंबर को पूर्वी उत्तर प्रदेश में अनेक स्थानों पर बारिश या गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ने की बहुत संभावना है। कुशीनगर में भारी बारिश की संभावना वाले जिलों में शामिल किया गया है। तेज सतही हवा 30 से 40 किमी प्रति घंटा चल सकती है, जबकि झोंकों में इसकी गति 50 किमी प्रति घंटा तक पहुंचने की संभावना है। गरज-चमक और वज्रपात का भी खतरा है।
25 सितंबर को कुशीनगर में भारी बारिश की संभावना बनी रहेगी। गरज-चमक के साथ 40 से 50 किमी प्रति घंटा की हवा चल सकती है और झोंकों में गति 60 किमी प्रति घंटा तक पहुंचने की संभावना है। 26 सितंबर को भी जिले में भारी बारिश के साथ गरज-चमक और 40 से 50 किमी प्रति घंटा की तेज हवा के झोंके 60 किमी प्रति घंटा तक पहुंच सकते हैं। 27 सितंबर को भारी बारिश और तेज हवा की संभावना है। 28 सितंबर को जिले के लिए कोई चेतावनी नहीं दी गई है।

धान-मक्का और गन्ने को नुकसान की आशंका
मौसम विभाग ने कृषि पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों को भी बताया है। भारी बारिश और जलभराव से गन्ने की जड़ों में हवा का संचार कम होने, पोषक तत्वों की कमी, पौधों के गिरने और लाल सड़न रोग का खतरा बढ़ सकता है। किसानों को खेत से पानी की निकासी सुनिश्चित करने और जलभराव की स्थिति में सिंचाई व नाइट्रोजन का प्रयोग नहीं करने की सलाह दी गई है।
खरीफ मक्का में भारी बारिश से तैयार फसल गिर सकती है और भुट्टों में सड़न व फंगस लगने का खतरा है। मौसम विभाग ने जल निकासी सुनिश्चित करने और शारीरिक रूप से परिपक्व भुट्टों की तत्काल कटाई कर सुरक्षित ऊंचे स्थान पर रखने की सलाह दी है। धान में जलभराव, पौधों के गिरने और फफूंद व जीवाणु रोगों का खतरा बताया गया है। बारिश के बाद अतिरिक्त पानी निकालने और अनावश्यक नत्रजन नहीं देने की सलाह है।
अरहर, तिल, मूंगफली और सब्जियों में भी सावधानी
अरहर में 24 से 48 घंटे जलभराव रहने पर जड़ों के सड़ने का खतरा है। किसानों को तुरंत गहरी नालियां बनाकर पानी निकालने तथा खेत गीला रहने तक निराई-गुड़ाई और रासायनिक खाद का प्रयोग नहीं करने को कहा गया है। मूंगफली और तिल में भी जलभराव से जड़ सड़ने, पत्तियां पीली पड़ने और फसल को नुकसान की आशंका है। सब्जियों में जलभराव, जड़ सड़न, पौधों के गिरने तथा फफूंद और जीवाणु रोग बढ़ने की संभावना है।
तेज हवा में गन्ना, केला और पपीता संभालें
तेज हवा से गन्ने की लंबी फसल गिर सकती है। किसानों को 4-5 गन्नों को आपस में बांधकर सहारा देने और जड़ों पर मिट्टी चढ़ाने की सलाह दी गई है। धान में अतिरिक्त पानी निकालने और नई सिंचाई रोकने को कहा गया है। केला और पपीता जैसी फसलों को तेज हवा से बचाने के लिए मजबूत बांस या लकड़ी का सहारा देने की सलाह है।
आंधी-वज्रपात में पेड़ के नीचे न रुकें
मौसम विभाग ने लोगों को गरज-चमक और तेज हवा के दौरान घर के अंदर रहने, खिड़की-दरवाजे बंद रखने और संभव हो तो यात्रा से बचने की सलाह दी है। बिजली और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को अनप्लग करने तथा वाहन चलाते समय सावधानी बरतने को कहा गया है। खुले स्थान में पेड़ के नीचे आश्रय लेने से बचने और सुरक्षित पक्के भवन में रहने की सलाह दी गई है। भारी बारिश में निचले इलाकों, मौसमी नालों, जलभराव वाली सड़कों और बाढ़ की आशंका वाले स्थानों से दूर रहने को कहा गया है।
तापमान और आर्द्रता: इस आईएमडी बुलेटिन में कुशीनगर के लिए अधिकतम/न्यूनतम तापमान तथा आर्द्रता का अलग से संख्यात्मक आंकड़ा नहीं दिया गया है, इसलिए इन्हें खबर में अनुमान के आधार पर शामिल नहीं किया गया है।
Author: Anoop k. Yadav
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