फतेहपुर बेदखली मामले में डीएम ने खारिज की अपील, क्या अब चलेगा बुलडोजर

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देवरिया।
जिले के चर्चित फतेहपुर बेदखली मामले में जिलाधिकारी कोर्ट ने अपील खारिज कर दी है। डीएम कोर्ट ने रुद्रपुर तहसीलदार के 11 अक्तूबर के फैसले को बरकरार रखा है। कहा है कि तहसीलदार न्यायालय के आदेश में हस्तक्षेप किया जाना अनुचित व विधि की मंशा के विपरीत है। उनके न्यायालय से कोई स्थगन आदेश होगा तो उसे निष्प्रभावी व निरस्त किया जाता है।
दो अक्तूबर 2023 को भूमि विवाद में रुद्रपुर कोतवाली क्षेत्र स्थित फतेहपुर ग्रामसभा के लेड़हा टोले में अभयपुर टोला निवासी पूर्व जिला पंचायत सदस्य प्रेमचंद यादव की हत्या कर दी गई थी। इससे आक्रोशित प्रेमचंद के परिजनों और भीड़ ने लेहड़ा टोले पर धावा बोलकर सत्यप्रकाश दूबे, उनकी पत्नी किरन, बेटी सलोनी और नंदनी तथा बेटे गांधी को बेरहमी से मार डाला था। सत्यप्रकाश दूबे की बेटी शोभिता की तहरीर पर पुलिस ने प्रेमचंद यादव समेत 27 नामजद और 50 अज्ञात के खिलाफ केस दर्ज किया। डीएम के आदेश पर 4 अक्तूबर को एसडीएम न्यायिक सीमा पांडेय के नेतृत्व में राजस्व टीम ने पूर्व जिला पंचायत सदस्य प्रेमचंद के घर के आसपास की भूमि की पैमाइश की गई। मकान का दो तिहाई हिस्सा खलिहान में बना मिला। ग्रामसभा ने रुद्रपुर तहसीलदार कोर्ट में वाद दाखिल किया। तहसीलदार ने 6 अक्तूबर को प्रेमचंद के पिता रामभवन, गोरख और परमहंस को नोटिस जारी की। आपत्ति आने पर 9 अक्तूबर को 15 सदस्यीय राजस्व टीम ने पुन: पैमाइश की। तीनों के मकान खलिहान, नवीन परती व वन भूमि में बने मिले। तहसीलदार अरुण कुमार ने 11 अक्तूबर को बेदखली का आदेश सुनाया। इसके खिलाफ 30 अक्तूबर  को रामभवन की बहू, प्रेमचंद की पत्नी प्रेमशीला, गोरख की पत्नी विमला व परमहंस की पत्नी गुलाबपति के अधिवक्ता रामनगीना ने डीएम कोर्ट में अपील की। सुनवाई के दौरान दोनों पक्ष के अधिवक्ताओं ने साक्ष्य व तर्क रखे। मामले में ठीक दो महीने बाद 30 दिसंबर 23 को डीएम अखंड प्रताप सिंह ने अपना फैसला सुनाया। कहा है कि तहसीलदार न्यायालय के आदेश में हस्तक्षेप किया जाना अनुचित व विधि की मंशा के विपरित है, इसलिए अपील खारिज की जाती है।

Ibn Bharat
Author: Ibn Bharat

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