मासूम के गुल्लक में जमा सपने थे, नेपाल की त्रासदी देख सब पीड़ितों के नाम कर दिए

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मासूम अल्फाज ने डीएम को सौंपी सालभर की बचत, बोला- ‘साहब, इसे नेपाल बाढ़ पीड़ितों तक पहुंचा दीजिए’

नेपाल में आई बाढ़ और उससे मची तबाही की तस्वीरें देखकर एक मासूम का दिल इस कदर पसीजा कि उसने अपनी छोटी-सी दुनिया की सबसे बड़ी जमा पूंजी जरूरतमंदों के नाम कर दी। पडरौना तहसील क्षेत्र के बेतिया गांव निवासी अल्फाज शेख अपनी गुल्लक लेकर जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचा और जिलाधिकारी महेंद्र सिंह तंवर को अपनी बचत सौंपते हुए उसे नेपाल बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए राहत कोष में जमा कराने का अनुरोध किया।

नेपाल की तबाही देख पसीजा मासूम का दिल, डीएम को सौंप दी सालभर की बचत।

अल्फाज ने यह रकम एक-दो दिन में नहीं जुटाई थी। करीब एक साल से वह अपनी गुल्लक में पैसे जमा कर रहा था। उसमें उसके छोटे-छोटे शौक पूरे करने की उम्मीदें थीं, लेकिन टीवी और सोशल मीडिया पर नेपाल में आई बाढ़ की तस्वीरें देख उसके मन में कुछ और ही चल रहा था। लोगों को अपना घर, सामान और अपनों को खोते देखकर उसने तय किया कि उसकी गुल्लक में जमा रकम अब उसके काम नहीं, बल्कि किसी मुसीबत में फंसे इंसान के काम आएगी।
गुरुवार को वह अपने दादा के साथ कलक्ट्रेट पहुंचा। हाथ में गुल्लक और साथ में जिलाधिकारी को संबोधित ज्ञापन लेकर पहुंचे अल्फाज ने प्रशासन से आग्रह किया कि गुल्लक में एकत्र पूरी धनराशि को उचित एवं अधिकृत राहत कोष में जमा कराया जाए, ताकि यह रकम नेपाल बाढ़ पीड़ितों तक पहुंच सके।

 

नेपाल बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए अपनी गुल्लक जिलाधिकारी को सौंपता मासूम अल्फाज।

वीडियो में भी मासूम अल्फाज जिलाधिकारी को अपनी गुल्लक सौंपता दिखाई दे रहा है। जिलाधिकारी ने उसकी संवेदनशीलता और पहल की सराहना की तथा भरोसा दिलाया कि उसकी भावना का सम्मान करते हुए धनराशि जरूरतमंदों तक पहुंचाने की प्रक्रिया की जाएगी।

गुल्लक छोटी थी, लेकिन अल्फाज का दिल बहुत बड़ा निकला
जिस उम्र में बच्चे अपनी बचत से खिलौने, चॉकलेट और मनपसंद चीजें खरीदने के सपने देखते हैं, उसी उम्र में अल्फाज ने अपनी पूरी बचत किसी अनजान पीड़ित के लिए देने का फैसला किया। उसके लिए नेपाल की सीमा मायने नहीं रखी, न ही यह कि वहां रहने वाले लोग उसके अपने हैं या पराए। उसे सिर्फ इतना दिखाई दिया कि कुछ लोग मुसीबत में हैं और उसकी छोटी-सी मदद उनके काम आ सकती है।
अल्फाज की इस पहल की सोशल मीडिया से लेकर स्थानीय स्तर तक सराहना हो रही है। इससे पहले भी उसकी पहल को लेकर प्रकाशित खबरों में बताया गया है कि उसने टीवी और सोशल मीडिया के माध्यम से नेपाल की बाढ़ की भयावहता देखी और उसी से प्रभावित होकर अपनी बचत दान करने का निर्णय लिया।

मासूम की यह पहल सिर्फ एक गुल्लक सौंपने की घटना नहीं, बल्कि इंसानियत की वह तस्वीर है, जो बताती है कि मदद के लिए उम्र या हैसियत नहीं, सिर्फ एक संवेदनशील दिल चाहिए।
— अनूप कुमार

 

A kumar
Author: A kumar

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