नारायणी का जलस्तर बढ़ा, फिर भी पुल के पायों के पास बैठकर बीयर पीते दिखे युवक; सेल्फी-रील के लिए रेलवे ट्रैक तक पहुंच रहे लोग
कुशीनगर। कभी अपनी खूबसूरती और ऐतिहासिक महत्व के लिए पहचान रखने वाला कुशीनगर का पनियहवा पुल अब लापरवाही और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवालों के घेरे में है। नारायणी नदी पर बना यह पुल उत्तर प्रदेश, बिहार और नेपाल को जोड़ने वाला महत्वपूर्ण मार्ग है। इन दिनों पुल के पिलर और पायों के आसपास युवाओं के पहुंचकर बैठने, खाना-पीना, सेल्फी और रील बनाने का सिलसिला बढ़ता जा रहा है।
इसी बीच सोशल मीडिया पर करीब 36 सेकंड का एक वीडियो वायरल हो रहा है। वीडियो में तीन युवक पुल के नीचे बचे एप्रोच वाले हिस्से पर खड़े दिखाई दे रहे हैं। वीडियो में युवक बीयर की बोतल से शराब पीते नजर आ रहे हैं। जिस स्थान पर वे खड़े हैं, उसके आसपास नारायणी नदी का पानी और तेज बहाव दिखाई दे रहा है। ऐसे में जरा सी चूक जानलेवा हो सकती है।
नदी का जलस्तर बढ़ा, फिर भी खतरे वाले हिस्से में पहुंच रहे लोग
खास बात यह है कि इन दिनों नारायणी नदी का जलस्तर बढ़ा हुआ है और नदी क्षेत्र को लेकर प्रशासनिक स्तर पर सतर्कता बरती जा रही है। इसके बावजूद युवाओं का नदी के बेहद करीब संवेदनशील स्थान तक पहुंचना गंभीर चिंता का विषय है।
पुल के आसपास सिर्फ शराब पीने का मामला नहीं है। सेल्फी, रील और वीडियो बनाने के लिए लोग लगातार जोखिम वाले स्थानों पर पहुंच रहे हैं। बताया जा रहा है कि रेलवे ट्रैक पर भी महिलाएं और बच्चे रील बनाते नजर आ चुके हैं। रेलवे लाइन पर इस तरह खड़े होकर वीडियो बनाना कभी भी गंभीर हादसे का कारण बन सकता है।
दो चौकियों के बीच पुल, फिर भी निगरानी पर सवाल
पनियहवा पुल की सुरक्षा और निगरानी को लेकर सबसे बड़ा सवाल यह है कि दो पुलिस चौकियों के बीच होने के बावजूद लोग पुल के नीचे और रेलवे ट्रैक जैसे संवेदनशील स्थानों तक कैसे पहुंच रहे हैं?
पुल के एक तरफ पनियहवा पुलिस चौकी और दूसरी तरफ सलीकपुर चौकी बताई जाती है। इसके बावजूद यदि युवक पुल के नीचे जाकर शराब पी रहे हैं और लोग रेलवे ट्रैक पर रील बना रहे हैं तो यह नियमित निगरानी और गश्त की व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है।
हादसे के बाद कार्रवाई नहीं, पहले रोकथाम की जरूरत
नारायणी नदी में जलस्तर बढ़ने के दौरान खतरे वाले स्थानों पर लोगों की आवाजाही रोकना और पुलिस गश्त बढ़ाना जरूरी है। पुल के पिलर, पायों और नदी के किनारे ऐसे स्थानों को चिह्नित कर वहां चेतावनी बोर्ड लगाने के साथ निगरानी भी बढ़ाई जानी चाहिए।
पनियहवा पुल सिर्फ आवागमन का मार्ग नहीं, बल्कि क्षेत्र की महत्वपूर्ण पहचान भी है। ऐसे में इसकी खूबसूरती और आसपास का क्षेत्र रील और सेल्फी के लिए जोखिम उठाने का अड्डा न बने, इसके लिए प्रशासन को समय रहते सख्त कदम उठाने की जरूरत है।
क्योंकि हादसा होने के बाद कार्रवाई करने से बेहतर है—हादसा होने से पहले सावधानी बरती जाए।




