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देवरिया।
देवरिया जिले से बिहार ले जा रहे एक ट्रक एल्युमिनियम तार को श्रीरामपुर पुलिस ने पकड़ा। इसकी भनक तस्कर और कंपनी के अधिकारी को लगी तो वह भिंगारी एसडीओ के साथ थाने पहुंच गए। जहां पर दोनों ने पुलिस को गुमराह करते हुए चालक के भटकने की बात कहकर गाड़ी को छुड़वा कर अपने साथ ले गए। जबकि चालक ने गाड़ी को बिहार ले जाने की बात बताई थी। तस्कर विभाग के तार को रात के अंधेरे में ट्रक पर लोड कर बिहार पहुंचाने का कार्य कर रहे है। जिससे विभाग को लाखों रुपये को चुना कंपनी और तस्कर मिलकर लगा रहे है।
देवरिया जिले में गांव से लेकर शहर तक के तार और पोल वर्षो पूर्व लगे हुए थे। जर्जर जार के चलते आए दिन फाल्ट से विद्युत आपूर्ति ठप हो जाती थी। इसे देखते हुए बिजली विभाग ने गांव से लेकर शहर तक के जर्जर जार और पोल बदलने की योजना बनाया। विभाग ने डीएसएस योजना के तहत जिले में एलटी की एल्युमिनियम तार के स्थान पर एरियल बंच्ड केबल और पोल बदलने का कार्य कोलकोता की कंपनी लेजर इंफ्रा प्राइवेट लिमिटेड को 100 करोड़ रुपये में दिया गया। कंपनी ने जिले में पोल और तार बदलने के लिए छोटे छोटे ठेकेदारो को देकर कार्य कराया जा रहा है। जिले में शहर और गांव के जर्जर पोल को बदलकर नया पोल लगाया जा रहा है। इसके साथ ही एसटी के लगे हुए एल्युमिनियम के तार को बदलकर उनके स्थान पर एबीसी लगाया जा रहा है। 9 जनवरी की रात में श्रीरामपुर के थानेदार कल्याण सिंह सागर पुलिस टीम के साथ रात्रीगश्त में निकले हुए थे। अभी वह प्रतापपुर – मैरवा मार्ग पर हदहदवा भवानी मंदिर के पास एक ट्रक तेजी से बिहार की तरफ जा रहा था। पुलिस ने ट्रक को रोकने के लिए लाइट जलाया तो चालक गाड़ी की स्पीड बढ़ा दिया। पुलिस ने बिहार बार्डर से दो किमी अंदर ट्रक को पकड़ा। जांच करने में ट्रक में तार लदा हुआ था, चालक से समान का कागज मांगने पर वह दिखा नहीं सका। ट्रक चालक से पूछताछ में बिहार जाने की बात सामने आई। पुलिस गाड़ी को लेकर श्रीरामपुर थाने पहुंची। इसकी जानकारी कंपनी के अधिकारियों को हुई तो वह बिजली विभाग के आलाधिकारियों को सूचना नहीं दिए। वह भिंगारी बाजार के विद्युत विभाग के एसडीओ को लेकर थाने पहुंच गए। जहां पर विभाग के अधिकारी ने चालक द्वारा भटक कर देवरिया से बिहार बार्डर पर आने की बात कहीं गई। थानेदार ने एसडीओ के लिख कर देने के बाद ट्रक को तार समेत छोड़ दिया। इसकी चर्चा विभाग में जोड़ो से हो रही है। विभाग के कुछ अधिकारी , कंपनी और तस्करों के साथ मिलकर इस खेल को अंजाम दे रहे है। तस्करी में विभाग को लाखों रुपये का नुकसान हो रहा है।

जिला मुख्यालय से 60 किमी दूर बिहार बार्डर पर कैसे पहुंचा तार
जिला मुख्यालय से नया और पुराने तार को लेकर आखिर ट्रक जिला मुख्यालय के स्टोर से 60 किमी दूर बिहार बार्डर पर कैसे पहुंचा। विभाग के एसडीओ ने जो पुलिस को रास्ते भुलने की कहानी बताई है वह किसी के गले नहीं उतर रहा है। ट्रक चालक कुछ दूर जाने के बाद रास्ता पूछते है। वहीं कंपनी ट्रक में जीपीएस लगाए हुए है। जिससे ट्रक के लोकेशन के बारे में जानकारी होती है। बिहार जा रहे तार के बारे में भिंगारी बाजार के एसडीओ ने एसई को इसके बारे में जानकारी नहीं दी। जिससे की इस मामले की जांच किया जा सके।

पुलिस की मुस्तैदी से बच गया लाखों रुपये का तार
श्रीरामपुर पुलिस की मुस्तैदी से 9 जनवरी की रात में बिजली विभाग का लाखों रुपये  का तार बच गया। तस्कर और कुछ अधिकारी की मिलीभगत से जिले से बड़े पैमाने बिजली तारो की तस्करी किया जाता है। यहां जिले में उतारे जा रहे तोरों को कंपनी के स्टोर में जमा करना होता है। जहां से कंपनी उसे बिजली विभाग के स्टोर में जमा कराती है। लेकिन कंपनी के स्टोर से तार सीधे बिहार पहुंचाया जा रहा है। गांव के लोगों का कहना है कि बराबर ट्रक से तस्करी का समान बिहार पहुंचाया जा रहा है।

मेन सड़क को छोड़ कर छोटे रास्ते को अपनाते है तस्कर
देवरिया जिले से तार समेत अन्य समान यूपी से आए दिन बिहार में भेजा जाता है। इन तारों को बिहार में मोटा रकम मिल जाता है। इसके लिए तस्कर यूपी बिहार बार्डर के मेन सड़क और चेक पोस्टो के रास्ते नहीं जाते है। वह छोटे रास्ते से बिहार से जुड़ने वाले बिना पोस्ट के मार्ग को चुनते है। पिछले दिनों पकड़ा गया तार से तस्करों की कहानी खुल कर सामने आ गई है।
कोट-
बिहार बार्डर पर ट्रक में तार पकड़े जाने की जानकारी नहीं है। इसके बारे में भिंगारी एसडीओ ने भी इसकी जानकारी नहीं दिया है। मामला संज्ञान में आया है। इसके बारे में जांच कराई जाएंगी। जो भी जिले में तार उतारा गया है उसे विभाग में स्टोर में जमा कराने का प्रावधान है। ऐसा नहीं करने पर कंपनी के भुगतान से कटौती किया जाएगा।
जीसी यादव, अधीक्षण अभियंता देवरिया।
कोट-
बिजली विभाग का तार लदा एक ट्रक को श्रीरामपुर थानेदार ने पकड़ा था, जिसे एसडीओ विद्युत विभाग के लिखित रुप से देवरिया गाड़ी जाने की बात कहा गया। इसके बाद गाड़ी विभग को सौंप दिया गया था।
संकल्प शर्मा, पुलिस अधीक्षक, देवरिया

Ibn Bharat
Author: Ibn Bharat

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