
देवरिया। शहर के न्यू कॉलोनी स्थित संत विनोबा पीजी कॉलेज में प्राचार्य की कार्यप्रणाली को लेकर विवाद और बढ़ गया है। वर्तमान निवर्तमान अध्यक्ष बलमुकुंद मिश्र, पूर्व अध्यक्ष आनंद श्रीवास्तव सोनू और पूर्व अध्यक्ष निर्भय कुमार शाही उर्फ सिंटू ने सोमवार को सिविल लाइन रोड स्थित एक रेस्टोरेंट में आयोजित प्रेस वार्ता में प्राचार्य के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए।
छात्र नेताओं ने कहा कि प्राचार्य मनमानी रवैया अपनाते हुए छात्रों को प्रताड़ित कर रहे हैं। जब छात्र महाविद्यालय की सुविधाओं, शुल्क व्यवस्था, लैब-सुविधाओं, लाइब्रेरी और अन्य समस्याओं को लेकर आवाज उठाते हैं या धरना–प्रदर्शन करते हैं, तो प्राचार्य उनकी बात सुनने के बजाय नोटिस जारी कर उन्हें “देख लेने” की धमकी देते हैं।
छात्र नेताओं ने बताया कि 10 नवंबर को वे छात्रों की समस्याओं पर चर्चा के लिए स्वयं प्राचार्य कक्ष पहुंचे थे, लेकिन बातचीत के बजाय प्राचार्य ने उनके विरुद्ध सदर कोतवाली में मुकदमा दर्ज करा दिया। इस कदम को छात्र नेताओं ने पूरी तरह से पक्षपातपूर्ण और तानाशाही बताया।
निवर्तमान अध्यक्ष बलमुकुंद मिश्र ने कहा कि प्राचार्य खुद कई अनियमितताओं और भ्रष्टाचार में लिप्त हैं। छात्रों से शुल्क वसूलने के बाद भी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई जा रहीं। जब छात्र इसका विरोध करते हैं तो उन्हें धमकी दी जाती है कि कॉलेज से निकाल दिया जाएगा या केस दर्ज करा दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह रवैया किसी भी शैक्षणिक संस्थान के लिए अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है और इसका पुरजोर विरोध किया जाएगा।
पूर्व अध्यक्ष निर्भय कुमार शाही उर्फ सिंटू ने कहा कि उनके ऊपर दर्ज कराया गया मुकदमा पूरी तरह से निराधार और झूठा है। उन्होंने इसे बदले की कार्रवाई करार दिया। उन्होंने बताया कि इस मामले में वे एसपी से मुलाकात कर चुके हैं और निष्पक्ष जांच की मांग की है। यदि न्याय नहीं मिला तो वे जिलेव्यापी आंदोलन शुरू करने को बाध्य होंगे।
पूर्व अध्यक्ष आनंद श्रीवास्तव सोनू ने कहा कि महाविद्यालय में समस्याओं का अंबार लगा है—कक्षाओं से लेकर प्रशासनिक व्यवस्था तक कई कमियां मौजूद हैं। इन समस्याओं को दूर करने के बजाय प्राचार्य छात्रों और छात्र नेताओं को डराने–धमकाने में लगे हुए हैं। उन्होंने कहा कि छात्र हितों के मुद्दे पर छात्र संघ संघर्ष जारी रखेगा और जरूरत पड़ने पर बड़ा आंदोलन भी किया जाएगा।
छात्र नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि समस्याओं का समाधान नहीं हुआ और उत्पीड़न बंद नहीं किया गया तो कॉलेज प्रशासन को व्यापक विरोध का सामना करना पड़ेगा।



