
देवरिया। मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) कार्यालय में मेडिकल क्लेम की फाइलों का निस्तारण बेहद धीमी गति से हो रहा है। स्थिति यह है कि वर्तमान में करीब डेढ़ हजार मेडिकल क्लेम फाइलें पेंडिंग पड़ी हैं। कार्यरत और सेवानिवृत्त कर्मचारियों को महीनों तक प्रतिपूर्ति पाने के लिए कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
सरकारी नियमों के तहत बीमार होने पर कर्मचारी, अधिकारी और उनके परिजन इलाज में हुए खर्च की प्रतिपूर्ति पाने के हकदार हैं। इलाज का बिल सबसे पहले संबंधित विभाग में संस्तुति के लिए भेजा जाता है, जिसके बाद फाइल सीएमओ कार्यालय भेजी जाती है। यहाँ पटल लिपिक बिल और बाउचर की जांच कर भुगतान की प्रक्रिया पूरी करते हैं।
करीब छह महीने पहले मेडिकल क्लेम का पटल एक नए लिपिक को दिया गया था। उस समय लगभग 200 फाइलें लंबित थीं, लेकिन जांच और निस्तारण की धीमी कार्यशैली के कारण अब फाइलों की संख्या बढ़कर 1500 के पार पहुंच चुकी है। बताया जा रहा है कि कई फाइलें 4–5 महीने बाद भी नहीं खोली गईं, जिससे समस्याएँ गंभीर रूप से बढ़ गई हैं।
हर दिन दर्जनों कार्यरत व रिटायर कर्मचारी भुगतान के लिए सीएमओ कार्यालय पहुंचते हैं, लेकिन निस्तारण की रफ्तार बेहद धीमी होने से उन्हें निराश होकर वापस लौटना पड़ता है। मेडिकल क्लेम कक्ष में फाइलों का ढेर लग गया है और बाहरी व्यक्तियों द्वारा फाइल देखने की शिकायतें भी सामने आई हैं।
जिला कृषि अधिकारी उदय शंकर सिंह, पुलिस कर्मी संजय सिंह यादव, शिक्षा विभाग के रामजीत यादव समेत सैकड़ों कर्मचारियों की फाइलें महीनों से क्लेम कक्ष में धूल खा रही हैं।
स्थिति बिगड़ने पर सीएमओ डा. अनिल कुमार गुप्ता ने 7 नवंबर को मेडिकल क्लेम सहित एक दर्जन बाबुओं का पटल परिवर्तन कर दिया। हालांकि नए लिपिक को अभी तक मेडिकल क्लेम का चार्ज नहीं मिला है, जिससे निस्तारण पर कोई प्रभाव नहीं पड़ पाया है।
सीएमओ डॉ. गुप्ता ने कहा कि उन्हें मेडिकल क्लेम फाइलों के लंबित होने की कई शिकायतें मिली थीं। इस पर पटल बदला गया है और नए वरिष्ठ सहायक को निर्देश दिया गया है कि चार्ज लेने के बाद फाइलों का तेजी से निस्तारण सुनिश्चित किया जाए।
मेडिकल क्लेम के अटके रहने से कर्मचारियों और रिटायर्ड अधिकारियों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। सभी की मांग है कि प्रशासन शीघ्र कार्रवाई कर फाइलों के निस्तारण की प्रक्रिया को पटरी पर लाए।


