डीडीयू ने स्थाई सम्बद्धता लेने को कॉलेजों को दिया 6 माह का वक्त

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गोरखपुर।

दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय प्रशासन ने लंबे समय से अस्थाई सम्बद्धता का विस्तार कर संचालन कर रहे कॉलेजों को लेकर सख्ती दिखाई है।

ऐसे कॉलेजों को चेतावनी दी गई है कि वे छह महीने के अंदर स्थाई सम्बद्धता के लिए प्रक्रिया आगे बढ़ाएं।

ऐसा न करने वाले कॉलेजों की सम्बद्धता खत्म कर दी जाएगी।

शासन के प्रावधान के अनुसार नया स्ववित्तपोषित कॉलेज खोलने पर तीन साल के लिए डीडीयू द्वारा अस्थाई सम्बद्धता दी जाती है। इस दौरान कॉलेजों को कुल आठ बिंदुओं पर अपने सभी मानक पूरे करने होते हैं। लेकिन अलग-अलग कारणों से करीब आधे से अधिक कॉलेज सम्बद्धता नहीं ले पाए हैं। डीडीयू से सम्बद्ध कुल 353 में से कुल 319 स्ववित्तपोषित कॉलेज हैं। इनमें कुल 150 कॉलेजों ने स्थाई सम्बद्धता ली है। बाकी अस्थाई सम्बद्धता को बार-बार विस्तारित कराकर संचालन कर रहे हैं।इनमें करीब 50 कॉलेज ऐसे हैं, जिनकी सम्बद्धता तो स्थाई है लेकिन कई पाठ्यक्रम अस्थाई सम्बद्धता से चल रहे हैं।कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने बताई की  के संज्ञान में यह मामला आया तो उन्होंने इसकी समीक्षा कराई। समीक्षा में यह बात सामने आई कि किसी कॉलेज में कुछ तो किसी में कुछ कमियां हैं।मानक पूरा न होने के कारण वे कॉलेज स्थाई सम्बद्धता नहीं ले रहे हैं यह भी पता चला है कि पिछले तीन-चार वर्षों में एक बार भी प्राचार्य की नियुक्ति के लिए एक्सपर्ट ही डीडीयू प्रशासन द्वारा नहीं दिया गया। स्थाई सम्बद्धता की कई फाइलें विश्वविद्यालय में धूल फांकती रहीं। कुलपति ने स्थाई सम्बद्धता के लिए आवेदन करने का निर्देश कॉलेजों को दिया है।

 

कठोर मानदंड पड़ रहे महाविद्यालयों पर भारी

स्थाई सम्बद्धता के लिए कुल आठ मानदंडों पर खरा उतरना होता है। कॉलेज के पास अनुमोदित स्थाई प्राचार्य होना चाहिए। पाठ्यक्रम के लिए अनुमोदित शिक्षक होना चाहिए। यूजी और पीजी की परीक्षा में पास होने का प्रतिशत 60 से अधिक होने चाहिए। प्राचार्यों और शिक्षकों के वेतन का भुगतान ऑनलाइन होना चाहिए। इन मानकों को पूरा करने में अधिकांश महाविद्यालय फिसड्डी साबित हो रहे हैं। कई कॉलेज मानक पूरा न होने के कारण लंबे समय से अस्थाई संबद्धता विस्तारित कराकर संचालन कर रहे हैं। यह उचित नहीं है। ऐसे कॉलेज मानक पूरा कर जल्द से जल्द स्थाई संबद्धता के लिए आवेदन करें। विश्वविद्यालय इसमें पूरा सहयोग करेगा।”

प्रो. पूनम टंडन, कुलपति, डीडीयू

Ibn Bharat
Author: Ibn Bharat

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