
देवरिया।
बीआरडी पीजी कॉलेज का लिपिक ने अपनी पत्नी को प्रोफेसर का वेतन दिलाता रहा। करीब 75 लाख रुपए के गबन के इस मामले में कॉलेज के प्राचार्य ने सदर कोतवाली में लिपिक और उसकी पत्नी के विरुद्ध सवा माह माह पूर्व तहरीर दिया था। इसके बाद भी कोतवाली पुलिस ने मामले में अभी तक मुकदमा दर्ज नहीं किया है। जिसे लेकर पुलिस किरकिरी हो रही है। गबन के मामने में पुलिस पर भी अब सवाल उठ रहे है।
बीआरडी पीजी कॉलेज के एक पूर्व प्राचार्य ने लैब अस्सिटेंट को लिपिक के कार्य के लिए लगा दिया था। इसके बाद उक्त कर्मचारी ने फर्जी कागजात बना कर अपनी पत्नी को वरिष्ठ प्रोफेसर के बराबर तनख्वाह का भेजवाने लगा। अक्तूबर माह में भूमि विवाद में लिपिक की हत्या के बाद फर्जीवाड़े का यह मामला सामने आया। मामले में तीन सदस्यीय जांच कमेटी ने जांच करने के बाद अपनी रिपोर्ट क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी को सौंप दी थी। जांच रिपोर्ट के आधार पर बीआरडीपीजी कॉलेज के प्राचार्य प्रो. शरद चन्द्र मिश्र ने 11 नवंबर को तहरीर सदर कोतवाली को भेजा। तहरीर में लिखा है कि कर्मचारी ने अपनी पत्नी की जनवरी 2019 में कॉलेज में नियुक्ति का फर्जी कागजात तैयार कर लिया। इसके बाद उसने वेतन बनाने के रिकार्ड में कूटरचना करने के बाद उसका वेतन शुरु करा दिया। इसके बाद से पत्नी के खाते में प्रतिमाह लाखों रुपये का भुगतान करता रहा। अक्तूबर माह में कर्मचारी के निधन के बाद गबन के बारे में जानकारी हुई। 30 सितंबर को बनाए अंतिम वेतन में भी उसकी पत्नी के यूनियन बैंक के अकाउंट में वेतन के रूप में 2.60 लाख कोषागार से ट्रांसफर हुआ। प्राचार्य के तहरीर के डेढ़ माह बाद भी कोतवाली पुलिस ने मामले में मुकदमा दर्ज नहीं किया है। इसके लिए महाविद्यालय के प्राचार्य ने पत्राचार किया है। इसके बाद पुलिस के मुकदमा दर्ज नहीं करने से पुलिस पर सवाल उठने लगे है। आखिर कोतवाली पुलिस किसके दबाव में मुकदमा दर्ज करने से कतरा रही है।




